आक्रामक राहुल गांधी में बदलाव के पीछे यह है राज

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कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी की ताजपोशी अक्टूबर के आखरी सप्ताह में होनी है, लेकिन उससे पहले पार्टी का रंग, रूप और तेवर बदलता हुआ नजर आ रहा है. इसकी शुरुआत राहुल गांधी ने अमेरिका से की और उसके बाद सीधे मोदी के गढ़ गुजरात की जमीन पर उतरकर बीजेपी को बैकफुट पर ला दिया है.

बता दें कि 2014 लोकसभा चुनाव की हार के बाद कांग्रेस वेंटिलेटर पर दिख रही थी. राहुल गांधी ने अपनी ताजपोशी से पहले कांग्रेस के मेकओवर का प्लान बनाया और उसे अमल में भी लाए. राहुल की रणनीति का असर ये देखने को मिल रहा है कि कांग्रेस पार्टी ने कई मुद्दों पर मोदी सरकार को घेर रखा है. सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक कांग्रेस पार्टी और कार्यकर्ता सक्रिय नजर आ रहे हैं.

जमीन पर संघर्ष

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अमेरिका से वापस आने के बाद एक नए तेवर में हैं और खुद जमीन पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं. पिछले एक महीने में राहुल दो बार गुजरात की जमीन पर उतरकर गुजरात की बीजेपी सरकार से लेकर केंद्र की मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया.

राहुल गुजरात के किंगमेकर माने जाने वाले पाटीदार समुदाय से मिले, किसानों से मिले, छात्रों से संवाद किया, मंदिर दर्शन किया. इतना ही नहीं राहुल ने आदिवासियों और ओबीसी समुदाय से भी सीधे संपर्क किया. राहुल इस बहाने पार्टी के उन नेताओं को भी साफ संकेत दे रहे हैं जो अभी तक एसी रूम में बैठकर राजनीति करते रहे हैं.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी उतरे जमीन पर

कांग्रेस के कई प्रदेश अध्यक्ष अपने-अपने राज्यों में जमीन पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं. यूपी के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने किसानों के मुद्दे को लेकर खुद धरने पर बैठे. राजस्थान में सचिन पायलट किसान यात्रा कर रहे हैं. वहीं हरियाणा में दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी हरियाणा में NSUI के लोगों से लेकर किसानों की पंचायत करके बीजेपी सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं.

पार्टी का मेकओवर

बीजेपी को मात देने के लिए कांग्रेस पार्टी का मेकओवर किया जा रहा है. इस कड़ी में सबसे पहले कांग्रेस कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट में बदलाव करने की योजना बनी है. मीडिया में कांग्रेस पार्टी के पक्ष को मजबूती और तर्कसंगत ढंग से रखने के लिए ‘स्पोकपर्सन आर्मी’ तैयार की जाएगी. प्रवक्ताओं की यह नई फौज कांग्रेस पार्टी का अहम हिस्सा होगी. कांग्रेस पार्टी देशभर में युवा प्रवक्ताओं की फौज पेश करेगी.

कांग्रेस मीडिया डिपार्टमेंट अपने पुराने मंत्र ‘थिंक ग्लोबल, एक्ट लोकल’ की लीक पर ही चलेगी यानी कांग्रेस के क्षेत्रीय नेता अपने राज्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मीडिया के समक्ष बहस और चर्चा करते नजर आएंगे. अब कांग्रेस अपने मुट्ठी भर प्रवक्ताओं पर निर्भर रहने की बजाय युवा प्रतिभाओं को आगे लाएगी, जो बीजेपी को कड़ी टक्कर देंगे. कांग्रेस राज्य कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को इस बाबत सूची भेजना शुरू कर दिया है.

मुद्दों की पहचान और नीति तय

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने देश के मौजूदा मुद्दों की पहचान भी कर ली है, जिनमें रोजगार, किसान, गरीबी और छोटे कारोबारियों से जुड़े हुए हैं. यही वजह है कि राहुल गांधी ने अमेरिका से लेकर गुजरात और अमेठी तक मोदी सरकार को घरेने के लिए इन्हीं मुद्दों को उठाया है.

मौजूदा समय में देश में लगातार बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, किसान बदहाल और गरीबी से जूझ रहे हैं. इसके अलावा देश में अमीर और गरीबी के बीच खांई चौड़ी होती जा रही है. मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी और GST से छोटे कारोबारियों की कमर टूट चुकी है. ऐसे में राहुल ने इन मुद्दों को उठाकर मोदी सरकार को घेरा है. यही वजह है कि बीजेपी के अंदर से भी इन मुद्दों को लेकर आवाज उठ रही है. संघ जुड़े कई संगठन भी मोदी की आर्थिक नीतियों को लेकर खुश नहीं है.

मोदी के हथियार से मोदी को घेरा

नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत का मुख्य हथियार सोशल मीडिया रहा है. जबकि 2009 में कांग्रेस के महज एक नेता शशि थरूर थे जिनका ट्वीटर अकाउंट था. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाया है.

राहुल गांधी के गुजरात दौरे के समय सोशल मीडिया पर चला ‘विकास पागल हो गया’ कैंपेन हो या फिर मोदी सरकार की नीतियों पर बने ‘मेमे’. इसके अलावा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे पर ट्वीट चुटकी ली ‘मोदीजी, जय शाह- ‘जादा’ खा गया, आप चौकीदार थे या भागीदार? कुछ तो बोलिए.’ कांग्रेस का सोशल मीडिया कैंपेन इन दिनों बदला-बदला सा नजर आ रहा है. इस बदलाव के पीछे कांग्रेस की नई डिजिटल टीम कमान संभाल रही हैं दिव्या स्पंदना उर्फ राम्या की भूमिका है.

कांग्रेस की सोशल मीडिया को नई धार देने के लिए दिव्या ने पेशेवरों की भर्ती की है. उनकी टीम में 85 प्रतिशत पेशेवर सदस्य हैं. दिव्या के कमान संभालने के बाद से राहुल गांधी भी हाल ही में ट्विटर पर सक्रिय हुए हैं. उनके साथ-साथ कई कांग्रेस नेता भी सोशल मीडिया पर आए हैं.

सॉफ्ट हिंदुत्व की राह

राहुल गांधी बीजेपी द्वारा कांग्रेस पार्टी पर लगाए गए ‘हिंदू विरोधी’ और ‘अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण’ जैसे आरोपों का भी जवाब देने का प्रयास कर रहे हैं. दरअसल 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की एक बड़ी वजह एंटनी कमेटी ने हिंदू विरोधी छवि मानी थी. राहुल ने गुजरात विधानसभा चुनाव के जरिए कांग्रेस की हिंदू विरोधी छवि को तोड़ने की कवायद शुरू कर दी है और सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड खेलते नजर आ रहे हैं

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र का तीन दिन का दौरा किया था. इस दौरान राहुल गांधी गुजरात के पांच मंदिरों में गए और राजकोट तथा जामनगर में गरबा में शामिल हुए. राहुल ने 25 सितंबर को द्वारकाधीश मंदिर में भगवान कृष्ण की पूजा कर अपनी यात्रा की शुरुआत की थी.मंदिरों में माथा टेकने के साथ-साथ राहुल माथे पर तिलक लगाए हुए भी नजर आए. यहां तक कि राहुल पहाड़ी पर स्थित देवी मां चामुंडा के दर्शनों के लिए बिना रुके ही 15 मिनट में एक हजार सीढ़ियां चढ़ गए थे. मध्य गुजरात के दौरे पर भी राहुल ने कई मंदिरों का दर्शन किया है.

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