राजीव गांधी हत्याकांड: केंद्र ने कहा, उम्रकैद की सजा पाये दो कैदी समय से पहले रिहाई के हकदार नहीं

- FILE PHOTO 16APR91 - A file photo of assassinated former Indian prime minister Rajiv Gandhi.  [A judge in the south Indian city of Madras on January 28 found 26 people guilty of conspiring to murder Gandhi during an election rally on May 21, 1991 and sentenced all of them to death by hanging. The judge also upheld a charge of conspiracy to kill Gandhi against Sri Lanka's Tamil Tiger rebels at the end of a marathon trial that began in May 1993].

– FILE PHOTO 16APR91 – A file photo of assassinated former Indian prime minister Rajiv Gandhi. [A judge in the south Indian city of Madras on January 28 found 26 people guilty of conspiring to murder Gandhi during an election rally on May 21, 1991 and sentenced all of them to death by hanging. The judge also upheld a charge of conspiracy to kill Gandhi against Sri Lanka’s Tamil Tiger rebels at the end of a marathon trial that began in May 1993].


राजीव गांधी हत्याकांड मामले में दोषी रॉबर्ट पायस और जयकुमार ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर की थीं.
गृह मंत्रालय ने हाई कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट की इस व्याख्या की वजह से, दोनों कैदी ‘‘समय से पहले रिहाई’’ के हकदार नहीं हैं कि ‘‘उम्र कैद का मतलब दोषी को पूरी उम्र भर कैद में रहना होता है.’

चेन्नई: केंद्र ने शुक्रवार (11 अगस्त) को मद्रास उच्च न्यायालय को बताया कि उच्चतम न्यायालय की इस व्याख्या की वजह से, राजीव गांधी हत्याकांड मामले में उम्र कैदी की सजा पाये दो कैदी ‘समय से पहले रिहाई’ के हकदार नहीं हैं कि ‘‘उम्र कैद का मतलब दोषी को पूरी उम्र भर कैद में रहना होता है.’’ राजीव गांधी हत्याकांड मामले में दोषी रॉबर्ट पायस और जयकुमार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर समय से पहले 180 दोषियों की रिहाई के प्रस्ताव में खुद को शामिल किए जाने की खातिर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर की थीं.

याचिकाओं पर नौ अगस्त को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ए सेल्वम तथा न्यायमूर्ति पोन कलैयारासन की पीठ ने केंद्र सरकार को ‘‘लंबे समय से मामले के लंबित रहने’’ पर विचार करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया.

इस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उच्च न्यायालय को बताया कि उच्चतम न्यायालय की इस व्याख्या की वजह से, दोनों कैदी ‘‘समय से पहले रिहाई’’ के हकदार नहीं हैं कि ‘‘उम्र कैद का मतलब दोषी को पूरी उम्र भर कैद में रहना होता है.’’ साथ ही उसने राजीव गांधी हत्याकांड मामले के दो दोषियों सहित सात दोषियों को उम्र कैद की सजा में छूट देने और रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के प्रस्ताव के बारे में भी बताया और कहा कि केंद्र सरकार ने इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी. न्यायालय ने यह मामला पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ के सुपुर्द कर दिया.

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